एमसीआई की प्रमुख सेवाएं होंगी ऑनलाइन उपलब्ध

मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) अप्रैल केदूसरे सप्ताह से डिजिटल होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अप्रैल के दूसरे सप्ताह से एमसीआई की प्रमुख सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध होगीं। किसी भी कागजी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। 20 से अधिक अनुप्रयोगों के साथ एचआर, फाइनेंस, इन्वेंटरी एमसीआई जैसी सभी आंतरिक सेवाओं को शामिल किया जा रहा। इस अवसर पर एमसीआई अध्यक्ष ने डीएमएमपी पोर्टल का उद्घाटन भी किया।

एमसीआई देशभर में वर्ष 2017 जुलाई तक 550 मेडिकल कॉmciलेजों में फैकल्टी की बॉयोमेट्रिक उपस्थिति के लक्ष्य को पूरा कर लेगा। डिजिटल होने के साथ ही एमसीआई के कार्यालय भी पेपरलेस हो जाएंगे। एमसीआई की अध्यक्ष जंयती बेन मेहता ने ई-गर्वनेंस डिजिटल मिशन मोड प्रोजेक्ट (डीएमएमपी) के उद्घाटन पर बोलते हुए यह बातें कहीं। एमसीआई ने 19 अगस्त 2016 को डिजिटल होने की दिशा में कदम बढ़ाया था।

एमसीआई अध्यक्ष ने कहा कि हमने डिजिटल के उद्देश्य को पाना शुरु कर दिया है। स्वास्थय मंत्रालय व एमसीआई के संयुक्त प्रयासों से 6-8 महीने के रिकॉर्ड समय में डीएमएमपी का विकास हुआ है। ऑनलाइन संकाय उपस्थिति सिस्टम के एक भाग के रुप में वर्तमान में 170 कॉलेजों की 50, 000 फैकल्टी पंजीकृत की गई है। इसके साथ ही 150 कॉलेजों में 1700 बॉयोमेट्रिक मशीनें लगाई गई हैं। अब अगले चरण में जाते हुए इस अभ्यास को वर्ष 2017 तक 550 कॉलेजों में पूरा कर लिया जाएगा।

पेपरलैस कार्यालय को प्राप्त करने के लिए 50 लाख पृष्ठों के डिजिटलीकरण को पूरा किया है और अब यह दस्तावेज प्रबंधन प्रणाली का हिस्सा है। इससे यह होगा कि पृष्ठों के खोने या गलत स्थान पर जाने की संभावना नहीं रहेगी। डिजिटल एमसीआई डिजिटल भारत के उद्देश्यों के लिए छोटा योगदान है।

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